नेशनल डेस्क, आर्या कुमारी।
नई दिल्ली। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने महाराष्ट्र में चल रहे छात्र आंदोलन को लेकर सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि हजारों छात्र शांतिपूर्ण तरीके से सड़कों पर उतरकर अपनी मांगें उठा रहे हैं और इसके पीछे केवल किसी एक परीक्षा या भर्ती का मुद्दा नहीं है, बल्कि छात्रों का पूरे सिस्टम से भरोसा टूट चुका है।
राहुल गांधी ने रविवार को सोशल मीडिया पर कहा कि केंद्र और राज्य, दोनों स्तरों पर भाजपा की सरकारों से छात्र परेशान हैं। उन्होंने पेपर लीक, लंबे समय से अटकी भर्तियों और शिक्षा के लगातार बढ़ते खर्च को छात्रों की प्रमुख समस्याओं में शामिल बताया। उनका कहना है कि इन मुद्दों ने छात्रों के भविष्य और उनके भरोसे दोनों को प्रभावित किया है।
उन्होंने छात्रावासों की स्थिति और वहां मिलने वाली सुविधाओं को लेकर भी सवाल उठाए। राहुल ने कहा कि कई छात्रों को अमानवीय परिस्थितियों में रहना पड़ रहा है और भोजन की गुणवत्ता को लेकर भी समस्याएं सामने आती रहती हैं। इसके अलावा प्रत्यक्ष लाभ अंतरण यानी डीबीटी में धोखाधड़ी जैसी शिकायतों का भी उन्होंने उल्लेख किया।
राहुल गांधी ने महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग यानी एमपीएससी को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि यह एक संवैधानिक संस्था है, लेकिन अब इस पर कब्जा कर इसकी विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचाया गया है। उनके मुताबिक, ऐसी स्थिति में छात्रों का विरोध केवल एक परीक्षा या भर्ती प्रक्रिया तक सीमित नहीं रह जाता, बल्कि यह व्यवस्था के प्रति उनके बढ़ते असंतोष को दर्शाता है।
कांग्रेस नेता ने कहा कि अपने बेहतर और सफल भविष्य की मांग को लेकर छात्रों की ओर से उठाई जा रही हर मांग जायज है। उनका कहना है कि छात्र अपनी शिक्षा, रोजगार और भर्ती प्रक्रिया को लेकर स्पष्टता और न्याय चाहते हैं, इसलिए सरकार को उनकी समस्याओं को गंभीरता से समझने और उन पर तत्काल कदम उठाने की जरूरत है।
राहुल गांधी ने सरकार से छात्रों की आवाज सुनने और उनकी मांगों पर तुरंत कार्रवाई करने की अपील की। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि छात्रों की समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो न्याय मिलने तक उनका आंदोलन और मजबूत होता जाएगा। उनके अनुसार, छात्रों की आवाज को नजरअंदाज करने से असंतोष और बढ़ सकता है।
महाराष्ट्र में छात्र आंदोलन को लेकर राहुल गांधी की यह प्रतिक्रिया ऐसे समय में आई है, जब बड़ी संख्या में छात्र अपनी विभिन्न मांगों को लेकर सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने इस आंदोलन को केवल एक परीक्षा या भर्ती से जुड़ा विवाद मानने के बजाय छात्रों के व्यवस्था पर घटते भरोसे से जोड़ते हुए सरकार से जल्द कार्रवाई की मांग की है।







