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महिला आरक्षण पर Mayawati का बड़ा हमला: कांग्रेस ‘गिरगिट’, सपा पर दोहरी राजनीति का आरोप

नेशनल डेस्क - वेरॉनिका राय

SC, ST, OBC और मुस्लिम समाज के अधिकारों पर सभी दलों को घेरा, 2011 जनगणना के आधार पर परिसीमन की मांग

लखनऊ । बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख Mayawati ने महिला आरक्षण को लेकर देश की प्रमुख राजनीतिक पार्टियों पर तीखा हमला बोला है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर किए गए अपने विस्तृत पोस्ट में उन्होंने कांग्रेस, समाजवादी पार्टी (सपा) और भाजपा पर आरोप लगाया कि ये दल अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) और मुस्लिम समाज के मुद्दों पर गंभीर नहीं रहे हैं।

मायावती ने कांग्रेस को “गिरगिट” करार देते हुए कहा कि उसने हमेशा दलितों, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों के मुद्दों पर दोहरा रवैया अपनाया है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी, तब इन वर्गों को आरक्षण का पूरा लाभ दिलाने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। अब महिला आरक्षण के मुद्दे पर इन वर्गों की चिंता जताना केवल राजनीतिक मजबूरी है।

ओबीसी आरक्षण के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि 27 प्रतिशत आरक्षण लागू कराने का श्रेय V. P. Singh की सरकार और बसपा के प्रयासों को जाता है। उन्होंने कहा कि मंडल आयोग की सिफारिशों को लागू करना सामाजिक न्याय की दिशा में बड़ा कदम था, लेकिन अन्य दलों ने इसे मजबूती से आगे नहीं बढ़ाया।

समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए मायावती ने कहा कि 1994 में पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट आने के बावजूद सपा सरकार ने पिछड़े मुस्लिमों को ओबीसी का लाभ नहीं दिया। उन्होंने दावा किया कि बसपा सरकार बनने के बाद ही इस निर्णय को लागू किया गया। उन्होंने सपा पर “दोहरे चरित्र” की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि यह पार्टी सत्ता में और विपक्ष में अलग-अलग रुख अपनाती है।

महिला आरक्षण के क्रियान्वयन को लेकर मायावती ने स्पष्ट किया कि यदि इसे जल्द लागू करना है, तो परिसीमन 2011 की जनगणना के आधार पर किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कांग्रेस आज सत्ता में होती, तो वह भी भाजपा की तरह ही फैसले लेती।

अपने बयान के अंत में मायावती ने SC, ST, OBC और मुस्लिम समाज से अपील की कि वे किसी भी राजनीतिक दल के बहकावे में न आएं। उन्होंने कहा कि इन वर्गों के वास्तविक हितों की रक्षा के लिए आत्मनिर्भर और सजग रहना जरूरी है, और फिलहाल महिला आरक्षण के तहत मिलने वाले लाभ को स्वीकार करना चाहिए।