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मुख्य चुनाव आयुक्त ने 'वोट चोरी' के आरोपों को बताया लोकतंत्र का अपमान

नेशनल डेस्क, श्रेया पांडेय |

मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार ने आज प्रेस कॉन्फ्रेंस में ‘वोट चोरी’ के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे भारतीय संविधान और लोकतंत्र की गरिमा पर हमला बताया। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग पर लगाए गए इस तरह के आरोप न केवल संस्थान की विश्वसनीयता को चोट पहुँचाते हैं, बल्कि करोड़ों ईमानदार मतदाताओं का भी अपमान करते हैं।

ज्ञानेश कुमार ने विपक्ष द्वारा बार-बार इस्तेमाल किए जा रहे ‘वोट चोरी’ जैसे शब्दों को अनुचित और आपत्तिजनक करार दिया। उनका कहना था कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से संचालित की जाती है और इस पर सवाल उठाना सीधे तौर पर मतदाताओं के विश्वास को चोट पहुँचाना है। उन्होंने दो टूक कहा कि यदि आरोप लगाने वाले नेताओं के पास सबूत हैं तो वे सात दिनों के भीतर शपथपत्र के साथ उसे प्रस्तुत करें, अन्यथा उन्हें देश से सार्वजनिक रूप से माफी माँगनी होगी उन्होंने साफ कहा, “इस मामले में कोई तीसरा विकल्प नहीं है। या तो सबूत दें या माफी माँगें।” मुख्य चुनाव आयुक्त का यह बयान स्पष्ट संकेत था कि आयोग अब बेबुनियाद आरोपों को नजरअंदाज करने के मूड में नहीं है।

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने बिहार में चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) प्रक्रिया पर भी विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस अभियान का उद्देश्य मतदाता सूची से मृतक, डुप्लीकेट या स्थानांतरित मतदाताओं के नाम हटाकर सूची को अद्यतन करना है। इस प्रक्रिया में करोड़ों मतदाताओं तक पहुँच बनाई गई है और उनके फॉर्म जमा किए गए हैं। राजनीतिक दलों को भी सूची की जांच और आपत्तियाँ दर्ज कराने का पूरा अवसर दिया गया है।

ज्ञानेश कुमार ने यह भी स्पष्ट किया कि चुनाव आयोग के लिए न तो कोई पक्ष है और न ही विपक्ष। सभी राजनीतिक दल आयोग के सामने समान हैं और आयोग का एकमात्र लक्ष्य निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव कराना है। उन्होंने कहा कि आयोग संविधान के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाता रहेगा और किसी दबाव में नहीं आएगा।

मतदाताओं की गोपनीयता पर जोर देते हुए उन्होंने चेतावनी दी कि बिना अनुमति मतदाताओं की तस्वीरें, पहचान या निजी जानकारी सार्वजनिक करना गलत है और ऐसी लापरवाहियों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

इस पूरे विवाद की पृष्ठभूमि तब बनी जब कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने बिहार में चल रही मतदाता सूची की विशेष पुनरीक्षण प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए इसे ‘वोट चोरी’ की कोशिश बताया। राहुल का आरोप था कि सूची में कई तरह की गड़बड़ियाँ और फर्जीवाड़े की संभावना है। इस पर चुनाव आयोग ने पहली बार खुलकर अपनी प्रक्रिया का बचाव किया और कहा कि यह पारदर्शी, तकनीकी रूप से सुदृढ़ और सभी राजनीतिक दलों को शामिल करने वाली प्रणाली है।

मुख्य चुनाव आयुक्त ने अंत में कहा कि भारत का चुनाव आयोग विश्व की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक संस्थाओं में से एक है, जिसकी विश्वसनीयता पर कोई प्रश्नचिह्न नहीं लगाया जा सकता। उन्होंने जनता से अपील की कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और अपने मताधिकार पर गर्व महसूस करें।