लोकल डेस्क, एन के सिंह।
खाकी का मानवीय चेहरा, अपनों से बिछड़ों के बीच जब 'कन्हैया' बनकर पहुँचे थानेदार,
मटन भोज और दुआओं से महका आश्रम।
रक्सौल: होली का त्योहार रंगों, उमंगों और अपनों के साथ खुशियाँ बाँटने का पर्व है। लेकिन समाज की मुख्यधारा से दूर कुछ ऐसे भी लोग हैं, जिनके पास न अपना घर है और न ही कोई अपना कहने वाला। इन बेसहारा और अपनों से बिछड़े लोगों की बेरंग जिंदगी में खुशियों के चटक रंग भरने के लिए रक्सौल के हरैया थाना प्रभारी किशन कुमार पासवान ने एक अनूठी और भावुक मिसाल पेश की है। अपनी टीम के साथ जब वे रक्सौल स्थित 'माहेर ममता निवास' पहुँचे, तो वहाँ का दृश्य खाकी के उस मानवीय चेहरे को उजागर कर गया, जो अक्सर ड्यूटी की सख्त परतों के पीछे छिपा रहता है।
भक्ति और ज्योत से हुई शुरुआत
कार्यक्रम का आगाज किसी सरकारी औपचारिकता जैसा नहीं, बल्कि एक पारिवारिक मिलन जैसा रहा। आश्रम के आँगन में "ज्योत से ज्योत जलाते चलो" के सुमधुर भजनों की गूँज के बीच दीप प्रज्वलित किया गया। दीप की लौ के साथ ही वहाँ मौजूद महिलाओं की आँखों में उम्मीद की चमक भी साफ देखी जा सकती थी।
आश्रम की महिलाओं ने भी थाना प्रभारी का स्वागत किसी ऊँचे अधिकारी की तरह नहीं, बल्कि घर आए किसी परिजन की तरह किया। माथे पर चंदन, हाथों में आरती की थाली और जुबां पर दुआएं—पूरा माहौल भक्तिमय और भावुक हो उठा। महिलाओं ने न केवल पुलिस टीम का अभिनंदन किया, बल्कि थाना प्रभारी और उनके परिवार की दीर्घायु और खुशहाली के लिए विशेष प्रार्थना भी की।
अबीर-गुलाल और मटन भोज का आनंद
त्योहार का असली मजा तब आया जब रंगों का खेल शुरू हुआ। थाना प्रभारी किशन कुमार पासवान ने खुद आगे बढ़कर आश्रम की निस्सहाय महिलाओं को लाल गुलाल लगाया। यह केवल गालों पर लगा रंग नहीं था, बल्कि उन एकाकी जीवन जी रही महिलाओं को यह एहसास दिलाने की कोशिश थी कि समाज उन्हें भूला नहीं है।
होली की खुशियों को स्वाद देने के लिए पुलिस की ओर से एक भव्य मटन भोज का आयोजन किया गया था। थाना प्रभारी ने पद की गरिमा और दूरी को किनारे रखते हुए, खुद अपने हाथों से सभी को बड़े ही प्रेम से भोजन परोसा। इतना ही नहीं, उन्होंने आश्रम की व्यवस्थाओं के लिए आर्थिक सहयोग भी प्रदान किया, जिससे त्योहार की खुशियाँ दोगुनी हो गईं।
"जब समाज के रक्षक ही अपनों की तरह साथ खड़े हो जाएं, तो बेसहारा होने का गम कम हो जाता है। पुलिस की इस पहल ने हमें अहसास कराया कि हम अकेले नहीं हैं।"— आश्रम की एक भावुक महिला
सहारे की उम्मीद लेकर लौटी मुस्कान
पुलिस बल और स्थानीय लोगों की इस छोटी सी कोशिश ने आश्रम की वृद्ध और निस्सहाय महिलाओं के चेहरों पर वह मुस्कान वापस ला दी, जो सालों पहले कहीं खो गई थी। हरैया थाना प्रभारी की इस मानवीय पहल की पूरे रक्सौल में चर्चा हो रही है। आम जनमानस का कहना है कि ड्यूटी की आपाधापी और व्यस्तता के बीच समय निकालकर समाज के सबसे निचले और उपेक्षित तबके के साथ खुशियाँ साझा करना एक अनुकरणीय उदाहरण है।
इस गौरवशाली अवसर पर पुलिस टीम के अन्य सदस्यों सहित स्थानीय प्रबुद्ध लोग भी उपस्थित रहे। माहेर के संचालक विनोद कुमार ने इस आयोजन के लिए पुलिस प्रशासन का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे कार्यों से ही समाज में पुलिस के प्रति विश्वास और सम्मान बढ़ता है।







