Ad Image
Ad Image
पुलिस ने राहुल गांधी, प्रियंका गांधी समेत कई वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं को हिरासत में लिया || PM के आवास के बाहर पेपर लीक और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे को लेकर धरने पर राहुल गांधी || PM मोदी के आवास के बाहर धरने पर राहुल गांधी समेत कांग्रेस के सभी दिग्गज || अमेरिकी और ईरान के बीच प्रारंभिक समझौता, 60 दिन का सीजफायर लागू || अमेरिकी सेंट्रल कमान की घोषणा, ईरान की नाकेबंदी समाप्त || ईरान - अमेरिका में टकराव चरम पर, नए हमलों से सीजफायर पर लग सकता ब्रेक || जापान: तूफान जोंगमी ने मचाई तबाही, 60 हजार से अधिक घरों में बिजली गुल || जयराम रमेश ने लिखा पत्र, ग्रेट निकोबार परियोजना पर पुनर्विचार की अपील || नई दिल्ली के मालवीय नगर स्थित रेस्टोरेंट में आग से 20 की मौत, दर्जनों घायल || ट्रंप ने कहा, खाड़ी देशों की अपील पर ईरान पर हमले बंद किए गए

The argument in favor of using filler text goes something like this: If you use any real content in the Consulting Process anytime you reach.

  • img
  • img
  • img
  • img
  • img
  • img

Get In Touch

रामलीला मैदान में विपक्ष का शक्ति प्रदर्शन, CEC से इस्तीफे की मांग

नेशनल डेस्क, शुभम कुमार तिवारी। 

INDIA गठबंधन के ‘चलो दिल्ली’ मार्च में पंजाब, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड से पहुंचे प्रदर्शनकारी; SIR और मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों को लेकर चुनाव आयोग पर उठाए सवाल।

नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में रविवार को विपक्षी INDIA गठबंधन ने अपने ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ अभियान के तहत रामलीला मैदान में बड़ी रैली आयोजित की। इस प्रदर्शन में पंजाब, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड सहित विभिन्न राज्यों से विपक्षी दलों के कार्यकर्ता, समर्थक और प्रदर्शनकारी शामिल हुए। रैली के दौरान प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) और इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (EVM) के इस्तेमाल को लेकर सवाल उठाए।

प्रदर्शनकारियों ने ‘वोट चोर, गद्दी छोड़’ और ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ जैसे नारे लगाए। विपक्षी दलों का आरोप है कि मतदाता सूची में गड़बड़ियों और मतदाताओं के नाम हटाए जाने से लोकतांत्रिक प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। इसी मुद्दे को लेकर गठबंधन ने मुख्य चुनाव आयुक्त से इस्तीफे की मांग की है।

रैली में शामिल होने के लिए विभिन्न राज्यों से आए प्रदर्शनकारियों ने दिल्ली पहुंचने के दौरान रास्ते में परेशानियों का आरोप लगाया। पंजाब के फिरोजपुर से पहुंचे प्रदर्शनकारी बलजिंदर सिंह ने ANI से बातचीत में दावा किया कि पंजाब-हरियाणा सीमा पर वाहनों को रोकने और बैरिकेडिंग के कारण उन्हें काफी परेशानी हुई। उन्होंने कहा कि कई वाहन रातभर रास्ते में फंसे रहे और प्रदर्शनकारियों को दिल्ली पहुंचने में देरी हुई। बलजिंदर सिंह ने आरोप लगाया कि सरकार विपक्ष के आंदोलन से घबराई हुई है और लोगों को रैली में शामिल होने से रोकने का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि, रास्ते रोकने के पीछे जानबूझकर राजनीतिक मंशा होने का यह प्रदर्शनकारियों का आरोप है।

राजस्थान से आए प्रदर्शनकारी पन्ना लाल शर्मा ने कहा कि वह चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के विरोध में दिल्ली पहुंचे हैं। उन्होंने EVM के इस्तेमाल पर सवाल उठाते हुए बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग की। उनका कहना था कि चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और मतदाताओं के भरोसे को मजबूत करने के लिए बैलेट पेपर पर विचार किया जाना चाहिए। उत्तराखंड कांग्रेस के सचिव मदनपाल सिंह ने भी चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा चुनावी व्यवस्था में लोकतांत्रिक संस्थाओं की निष्पक्षता को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा हुई हैं। उन्होंने कहा कि विपक्ष का आंदोलन मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग पूरी होने तक जारी रह सकता है।

हिमाचल प्रदेश से आए प्रदर्शनकारियों ने भी इस रैली में हिस्सा लिया। उन्होंने चुनावी अधिकारों के अलावा युवाओं, छात्रों और नागरिक अधिकारों से जुड़े मुद्दे उठाए। प्रदर्शनकारी गुलाब सिंह ने आरोप लगाया कि छात्रों को कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है और परीक्षा प्रश्नपत्र लीक होने जैसी घटनाएं युवाओं के भविष्य पर असर डाल रही हैं। हिमाचल प्रदेश के प्रदर्शनकारी गौरव शर्मा ने कहा कि वह लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा और केंद्र सरकार की नीतियों के विरोध में इस आंदोलन में शामिल हुए हैं। उनके अनुसार, मतदान का अधिकार लोकतंत्र की बुनियाद है और इसकी सुरक्षा सुनिश्चित करना जरूरी है।

विपक्षी गठबंधन की मुख्य मांग मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे से जुड़ी है। विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान कई जगहों पर मतदाताओं के नाम हटाए जाने और सूची में अनियमितताओं की शिकायतें सामने आई हैं। विपक्षी दलों का कहना है कि यदि पात्र मतदाताओं के नाम सूची से हटते हैं तो वे अपने मताधिकार से वंचित हो सकते हैं। इसी आधार पर विपक्ष चुनाव आयोग से पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और शिकायतों का जवाब देने की मांग कर रहा है। दूसरी ओर, चुनाव आयोग की प्रक्रिया और उसकी निष्पक्षता को लेकर उठाए गए इन सवालों पर अंतिम निष्कर्ष तथ्यों, आधिकारिक आंकड़ों और संबंधित जांच के आधार पर ही निकाला जा सकता है।

इससे पहले 31 अक्टूबर को INDIA गठबंधन के नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ एक प्रतीकात्मक ‘पब्लिक इम्पीचमेंट’ कार्यक्रम भी आयोजित किया था। इस कार्यक्रम में विपक्षी सांसदों ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मुख्य चुनाव आयुक्त की भूमिका को लेकर प्रस्ताव पारित किया। पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने इस प्रतीकात्मक प्रक्रिया की अध्यक्षता की, जबकि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी सहित कई विपक्षी नेता इसमें शामिल हुए। विपक्ष ने इस कार्यक्रम के माध्यम से मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ अपना राजनीतिक विरोध दर्ज कराया। हालांकि, यह संवैधानिक प्रक्रिया के तहत होने वाला औपचारिक महाभियोग नहीं था, बल्कि विपक्ष की ओर से आयोजित एक प्रतीकात्मक राजनीतिक कार्यक्रम था।

रविवार को प्रस्तावित ‘चलो दिल्ली’ मार्च की शुरुआत मिंटो रोड और कनॉट प्लेस जंक्शन से दोपहर 12 बजे होनी थी। यहां से विपक्षी नेता और समर्थक मार्च करते हुए रामलीला मैदान पहुंचने वाले थे, जहां मुख्य रैली आयोजित की गई। INDIA गठबंधन ने इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने की अपील की थी। गठबंधन ने छात्रों, युवाओं, महिलाओं, मजदूरों और नागरिक संगठनों से भी आंदोलन में भाग लेने का आग्रह किया। प्रदर्शन का उद्देश्य चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उठाना और चुनाव आयोग पर जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए दबाव बनाना बताया गया।

इस रैली के जरिए विपक्षी INDIA गठबंधन ने चुनावी सुधार, मतदाता सूची की पारदर्शिता और चुनाव आयोग की जवाबदेही को प्रमुख राजनीतिक मुद्दा बनाने की कोशिश की है। वहीं, मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग ने केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव को और तेज कर दिया है। अब इस आंदोलन का अगला चरण इस बात पर निर्भर करेगा कि विपक्ष अपनी मांगों को लेकर आगे क्या रणनीति अपनाता है और चुनाव आयोग इन आरोपों तथा शिकायतों पर क्या प्रतिक्रिया देता है।