नेशनल डेस्क, आर्या कुमारी।
नई दिल्ली, राज्य सभा के उप-सभापति हरिवंश नारायण सिंह ने कहा कि राष्ट्रहित से जुड़े मुद्दों पर देश में व्यापक सहमति बनाने में मीडिया की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है और उसे अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन पूरी गंभीरता के साथ करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि पत्रकारिता का मूल उद्देश्य आम लोगों तक सूचनाओं को प्रभावी ढंग से पहुँचाना है, ताकि समाज में जागरूकता बढ़े और राष्ट्रीय मुद्दों पर सामूहिक समझ विकसित हो सके। इसके लिए मीडिया कर्मियों को अपनी सामाजिक और राष्ट्रीय जिम्मेदारियों को भली-भांति समझना होगा।
मीडिया क्षेत्र में करियर बनाने की तैयारी कर रहे युवाओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि आज के दौर में तेजी से हो रहे बदलावों को समझना बेहद जरूरी है। उन्होंने युवाओं को प्रेरित किया कि वे बदलते समय के अनुसार अपने सपनों को आकार दें और उन्हें साकार करने के लिए पूरी निष्ठा से प्रयास करें।
उन्होंने यह भी कहा कि आज शिक्षित होने की परिभाषा बदल चुकी है। केवल पढ़ना-लिखना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि निरंतर नई चीजें सीखना और बदलते ज्ञान के साथ स्वयं को ढालना समय की मांग बन गया है।
नई पत्रकारिता के अवसरों पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि सूचना क्रांति के इस युग में मीडिया के क्षेत्र में अपार संभावनाएं मौजूद हैं। यदि युवा नए दृष्टिकोण के साथ काम करें और पारंपरिक सीमाओं से हटकर सोचें, तो वे अपने साथ-साथ देश के भविष्य को भी सशक्त बना सकते हैं।
तकनीकी बदलावों की गति पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि पहले जहां परिवर्तन में हजारों वर्ष लगते थे, वहीं अब तकनीक महीनों और वर्षों में बदल रही है। ऐसे में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के इस दौर में युवाओं को नए विचारों को अपनाकर अपने सपनों को साकार करने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।
उन्होंने कहा कि यदि युवा पूरी लगन और समर्पण के साथ अपने लक्ष्यों की ओर अग्रसर होंगे, तो वे हिंदी के पहले समाचार पत्र उदन्त मार्त्तण्ड की तरह इतिहास में अपनी एक अलग पहचान स्थापित कर सकते हैं।
कार्यक्रम के दौरान उन्होंने भारतीय जन संचार संस्थान की शोध पत्रिका ‘संचार माध्यम’ के विशेषांक का विमोचन भी किया, जो हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्षों की यात्रा पर आधारित है। इस अवसर पर संस्थान की कुलपति डॉ. प्रज्ञा पालीवाल गौड़ और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के संयुक्त सचिव डॉ. के. के. निराला भी उपस्थित रहे।
उन्होंने ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि इस दिशा में संचार, शोध और नवाचार की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होगी। वहीं कुलपति डॉ. गौड़ ने कहा कि ‘संचार माध्यम’ पत्रिका न केवल पत्रकारिता के नए रुझानों पर नजर रखती है, बल्कि भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक संदर्भ में प्रस्तुत करने का कार्य भी करती है।







