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राहुल गांधी की वोटर अधिकार यात्रा: कांग्रेस ने उत्तर बिहार में साधा समीकरण

स्टेट डेस्क, वेरोनिका राय |

राहुल गांधी की वोटर अधिकार यात्रा: कांग्रेस ने उत्तर बिहार में साधा समीकरण, सीटों पर बढ़ी दावेदारी....

राहुल गांधी की वोटर अधिकार यात्रा सिर्फ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर हमला करने तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसने कांग्रेस के लिए उत्तर बिहार में राजनीतिक समीकरण साधने और संगठन को नई ऊर्जा देने का बड़ा काम किया। यात्रा ने यह संकेत भी दिया कि कांग्रेस आने वाले विधानसभा चुनाव में महागठबंधन के भीतर अपने वजन को बढ़ाने और ज्यादा सीटों पर दावा करने की तैयारी कर रही है।

यात्रा के दौरान उत्तर बिहार के छह जिलों—मधुबनी, दरभंगा, मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी, पूर्वी चंपारण और पश्चिम चंपारण—में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। कुल 60 सीटों वाले इस क्षेत्र में राहुल गांधी की यात्रा 23 विधानसभा क्षेत्रों से गुजरी, जहां कांग्रेस को वोट समीकरण अपने पक्ष में दिखा। इन क्षेत्रों में दलित, पिछड़ा, अति पिछड़ा और मुस्लिम वोटरों की अच्छी-खासी संख्या है।

प्रियंका गांधी की एंट्री से मिला अतिरिक्त संदेश

यात्रा के दौरान मिथिलांचल में प्रियंका गांधी वाड्रा की मौजूदगी ने कार्यकर्ताओं का मनोबल और बढ़ाया। कांग्रेस ने यह संकेत दिया कि पार्टी सिर्फ भाजपा को घेरने की रणनीति नहीं बना रही, बल्कि उत्तर बिहार में अपना मजबूत आधार भी तलाश रही है।

मधुबनी जिले से यात्रा की एंट्री

यात्रा की शुरुआत मधुबनी जिले से हुई, जहां राहुल गांधी फुलपरास, लौकहा, मधुबनी और झंझारपुर विधानसभा क्षेत्रों से गुजरे। 2020 के चुनाव में फुलपरास सीट पर कांग्रेस दूसरे स्थान पर रही थी और इस बार भी यहां से पार्टी लड़ने की इच्छुक है। बेनीपट्टी सीट से भी कांग्रेस ने पिछला चुनाव लड़ा था, हालांकि यात्रा वहां नहीं गई।

दरभंगा में पुरानी हार से सीख

दरभंगा जिले में दरभंगा ग्रामीण, दरभंगा नगर, केवटी और जाले सीटों से यात्रा निकली। जाले सीट पर डॉ. मसकूर अहमद उस्मानी 2020 में दूसरे स्थान पर रहे थे और इस बार भी वे सक्रिय हैं। बेनीपुर और कुशेश्वरस्थान जैसी सीटों पर भी कांग्रेस ने पहले चुनाव लड़ा, लेकिन इस बार यात्रा वहां नहीं पहुंची। खास बात यह रही कि राहुल गांधी उत्तर बिहार के एकमात्र कांग्रेस विधायक के क्षेत्र मुजफ्फरपुर नगर नहीं पहुंचे।

मुजफ्फरपुर और सीतामढ़ी में नई जमीन की तलाश

मुजफ्फरपुर जिले के बोचहां, औराई, मीनापुर और गायघाट से यात्रा निकली। इन क्षेत्रों में दलित, महादलित और पिछड़ी जातियों का अच्छा प्रभाव है। बोचहां जैसी सुरक्षित सीट पर कांग्रेस अपनी जमीन तलाश रही है। सीतामढ़ी जिले की रुन्नीसैदपुर, सीतामढ़ी और रीगा सीटों पर एनडीए का कब्जा है, हालांकि रीगा से कांग्रेस को पिछले चुनाव में दूसरा स्थान मिला था।

चंपारण की सीटों पर भी नजर

पूर्वी चंपारण की ढाका, चिरैया, मोतिहारी, नरकटिया, हरसिद्धि और सुगौली तथा पश्चिम चंपारण की बेतिया और नौतन सीटों से भी यात्रा गुजरी। इनमें बेतिया और नौतन सीट पर कांग्रेस पिछली बार दूसरे स्थान पर रही थी। 2015 में बेतिया से कांग्रेस नेता मदन मोहन तिवारी को जीत भी मिली थी, जिससे इन सीटों पर कांग्रेस का दावा और मजबूत हुआ है।

कांग्रेस की नई रणनीति का संकेत

कुल मिलाकर राहुल गांधी की वोटर अधिकार यात्रा ने कांग्रेस के कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा भरी और यह स्पष्ट संकेत दिया कि पार्टी सिर्फ भाजपा के खिलाफ सियासी हमला नहीं कर रही, बल्कि अपने संगठन को मजबूत कर ज्यादा सीटों पर दावा ठोकने की तैयारी में है। मिथिलांचल और चंपारण क्षेत्रों में कांग्रेस को मिली प्रतिक्रिया से साफ है कि पार्टी महागठबंधन के भीतर अपनी bargaining power बढ़ाना चाहती है।

यह यात्रा केवल एक चुनावी शो नहीं थी, बल्कि उत्तर बिहार में कांग्रेस की पुनर्स्थापना की रणनीति भी रही।