नेशनल डेस्क, आर्या कुमारी।
नई दिल्ली। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर कांग्रेस मुख्यालय में राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के गायन को लेकर भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। भाजपा के राज्यसभा सांसद और प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व पर राष्ट्रगीत के अपमान का आरोप लगाते हुए पार्टी से देश की जनता से माफी मांगने की मांग की है। वहीं कांग्रेस ने वंदे मातरम् के गायन में किसी तरह की बाधा डालने या उसके अपमान के आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है।
सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि 14-15 अगस्त 1947 की मध्यरात्रि में जब स्वतंत्र भारत की पहली संविधान सभा की कार्यवाही शुरू हुई थी, तब इसकी शुरुआत वंदे मातरम् के साथ हुई थी। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान इसी राष्ट्रगीत को गाते हुए लाखों लोगों ने लाठियां और गोलियां झेलीं, जबकि हजारों स्वतंत्रता सेनानियों ने देश के लिए अपने प्राण न्योछावर किए और फांसी के फंदे पर चढ़ गए। त्रिवेदी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस की सत्ता की राजनीति और तुष्टिकरण की नीति के कारण वंदे मातरम् को उसके मूल स्वरूप से कम कर दिया गया।
भाजपा नेता ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संकल्प और देशवासियों की भावनाओं के अनुरूप इस बार स्वतंत्रता दिवस पर वंदे मातरम् को संपूर्ण रूप में गाया गया। हालांकि, उन्होंने कांग्रेस मुख्यालय में हुए समारोह के दौरान एक कथित आपत्तिजनक दृश्य का जिक्र करते हुए कांग्रेस नेतृत्व पर सवाल उठाए। त्रिवेदी के मुताबिक, वंदे मातरम् के गायन के दौरान सोनिया गांधी, राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे आपस में बातचीत करते और एक-दूसरे को इशारे करते हुए दिखाई दिए।
सुधांशु त्रिवेदी ने आरोप लगाया कि राष्ट्रगीत के गायन के दौरान एक व्यक्ति कांग्रेस के शीर्ष नेताओं के पास आकर उनसे कुछ कह रहा था और नेता भी आपस में इशारे कर रहे थे। उन्होंने इसे वंदे मातरम् के प्रति असम्मान बताते हुए कहा कि इससे देश के करोड़ों लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंची है। भाजपा नेता ने दावा किया कि इस पूरे घटनाक्रम से यह सवाल उठता है कि क्या कांग्रेस अभी भी वंदे मातरम् के संपूर्ण स्वरूप को स्वीकार करने के लिए तैयार है।
भाजपा सांसद ने कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व के कथित व्यवहार की निंदा करते हुए पार्टी से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को देश की जनता को यह स्पष्ट करना चाहिए कि राष्ट्रगीत के गायन के दौरान ऐसा व्यवहार क्यों हुआ। त्रिवेदी ने चेतावनी दी कि यदि कांग्रेस इस मामले में स्पष्टीकरण नहीं देती है तो संविधान के प्रति उसकी निष्ठा, स्वतंत्रता संग्राम के प्रति सम्मान और देश के करोड़ों नागरिकों की भावनाओं के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को लेकर गंभीर सवाल खड़े होंगे।
भाजपा ने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस मुख्यालय में स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान सोनिया गांधी ने वंदे मातरम् के सभी छह अंतरों के गायन पर आपत्ति जताई थी। इस आरोप को कांग्रेस ने सिरे से खारिज कर दिया। कांग्रेस की ओर से कहा गया कि सोनिया गांधी वंदे मातरम् के गायन पर आपत्ति नहीं जता रही थीं, बल्कि उन्होंने पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के लिए कुर्सी लाने को कहा था, क्योंकि खरगे काफी देर से खड़े हुए थे।
कांग्रेस ने यह भी स्पष्ट किया कि पार्टी मुख्यालय में वंदे मातरम् का पूरा गायन हुआ और इसके सभी छह अंतरे गाए गए। इस तरह भाजपा के आरोपों और कांग्रेस के खंडन के बाद स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान राष्ट्रगीत के गायन को लेकर दोनों दलों के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। भाजपा जहां इसे राष्ट्रगीत के प्रति कथित असम्मान का मामला बता रही है, वहीं कांग्रेस ने आरोपों को गलत बताते हुए पूरे घटनाक्रम की अलग व्याख्या पेश की है।







