बिजनेस डेस्क, श्रेया पाण्डेय।
भारतीय शेयर बाज़ार को लेकर निवेशकों में सतर्कता बढ़ी, बना एशिया का सबसे कम लोकप्रिय शेयर बाज़ार: BofA सर्वे
नई दिल्ली। बैंक ऑफ अमेरिका (BofA) के ताज़ा फंड मैनेजर सर्वे में एक चौंकाने वाला बदलाव सामने आया है। भारत ने इंडोनेशिया की जगह लेते हुए एशिया के सबसे कम पसंदीदा शेयर बाजार का दर्जा हासिल कर लिया है। यह सर्वे वैश्विक फंड मैनेजरों के बीच निवेशकों की बदलती सोच को दर्शाता है और यह संकेत देता है कि जिस बाजार को कभी निवेशकों की पहली पसंद माना जाता था, अब उसे लेकर सतर्कता बढ़ रही है। गौरतलब है कि भारतीय बाजार इस साल दुनिया के सबसे खराब प्रदर्शन करने वाले बाजारों में से एक रहा है।
सर्वे के अनुसार, कुल 32 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने भारत को लेकर 'नेट अंडरवेट' यानी कम निवेश की स्थिति अपनाई है। इसके पीछे कई कारण गिनाए गए हैं। सबसे बड़ी वजह भारतीय कंपनियों में स्पष्ट एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) एक्सपोज़र की कमी बताई गई है। इसके अलावा कमजोर आर्थिक वृद्धि दर, ऊंचा वैल्यूएशन (यानी शेयरों की कीमतें उनकी वास्तविक कमाई के मुकाबले महंगी होना), और नीतिगत सुधारों की धीमी रफ्तार को भी प्रमुख कारणों के रूप में चिन्हित किया गया है। एशिया की चौथी सबसे बड़ी इक्विटी मार्केट होने के बावजूद भारत को लेकर यह नकारात्मक रुख निवेशकों की गहरी चिंता को दर्शाता है।
यह पहली बार नहीं है जब भारतीय बाजार को इस तरह की स्थिति का सामना करना पड़ा है। मई महीने में भी भारत को BofA पोल में सबसे कम पसंदीदा बाजार करार दिया गया था, जब अमेरिका-ईरान युद्ध के चलते वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया था और इससे भारत की ऊर्जा लागत पर दबाव बढ़ गया था। अब संघर्ष के समाधान की कोई स्पष्ट उम्मीद न होने के कारण ऊर्जा की कीमतें फिर से बढ़ रही हैं, जिससे निवेशकों का भरोसा और कमजोर हो रहा है।
आंकड़ों के लिहाज़ से देखें तो निफ्टी 50 भले ही मार्च के हालिया निचले स्तर से 8 प्रतिशत ऊपर उठ चुका है, लेकिन यह अब भी इस साल एशिया के प्रमुख बाजारों में दूसरे सबसे खराब प्रदर्शन करने वाले सूचकांकों में शामिल है, जिसमें कुल मिलाकर 8 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। यह भारतीय बाजार के लिए विशेष रूप से चिंताजनक इसलिए भी है क्योंकि यह लगातार 10 वर्षों तक हर साल बढ़त हासिल करने की ऐतिहासिक लय को तोड़ने की कगार पर है।
दूसरी ओर, इंडोनेशिया के प्रति निवेशकों का नजरिया सकारात्मक हुआ है। इसकी मुख्य वजह जकार्ता कंपोज़िट इंडेक्स में जून के निचले स्तर से 20 प्रतिशत से अधिक की तेज़ी है। यह सुधार इंडोनेशिया के केंद्रीय बैंक द्वारा मुद्रा को स्थिर करने के लिए उठाए गए कदमों और MSCI द्वारा फ्रंटियर-मार्केट दर्जे में डाउनग्रेड की आशंका कम होने के चलते आया है।
कुल मिलाकर, यह सर्वे भारतीय शेयर बाजार के प्रति वैश्विक निवेशकों के बदलते और सतर्क रुख को उजागर करता है, जिसके पीछे तकनीकी क्षेत्र में सीमित उपस्थिति और आर्थिक सुधारों की धीमी गति जैसे कारण प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं।







