नेशनल डेस्क, आर्या कुमारी।
नई दिल्ली। सत्य निकेतन इलाके में 6 सितंबर को पांच मंजिला पीजी इमारत गिरने के मामले में पटियाला हाउस कोर्ट ने आरोपी सुधांशु और शुभम त्यागी को 12 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। दोनों पर हादसे में गिरी इमारत में पीजी संचालित करने का आरोप है। अदालत के आदेश के बाद दोनों आरोपी न्यायिक हिरासत में रहेंगे और मामले की जांच के दौरान उनसे पूछताछ भी की जाएगी।
पुलिस के मुताबिक, सुधांशु और शुभम त्यागी उसी इमारत में पीजी चला रहे थे, जो हादसे के दौरान ढह गई थी। इमारत गिरने की घटना के बाद मामले की जांच शुरू की गई और दोनों को आरोपी बनाया गया। अब जांच के दौरान दोनों से हादसे से जुड़े विभिन्न पहलुओं को लेकर पूछताछ की जाएगी, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इमारत में पीजी संचालन से जुड़े सुरक्षा इंतजाम किस तरह के थे और हादसे की परिस्थितियां क्या थीं।
इमारत गिरने की घटना के बाद राजधानी में पीजी इमारतों की सुरक्षा को लेकर भी बड़े स्तर पर जांच शुरू की गई। हादसे के बाद दिल्ली में कुल 2,250 पीजी का सर्वे किया गया। इस सर्वे के दौरान 138 इमारतों में मरम्मत की जरूरत पाई गई। इससे राजधानी में पीजी के तौर पर इस्तेमाल की जा रही इमारतों की सुरक्षा व्यवस्था और उनके रखरखाव को लेकर भी सवाल उठे हैं।
सर्वे में सामने आया कि मरम्मत की जरूरत वाली इमारतों में सबसे ज्यादा 90 पीजी दक्षिणी जोन में स्थित हैं। इस क्षेत्र में इन पीजी में करीब 47 हजार लोग रहते हैं। सर्वे के दौरान चार इमारतों को खतरनाक भी घोषित किया गया है। इन आंकड़ों के सामने आने के बाद पीजी इमारतों की सुरक्षा, उनकी स्थिति और उनमें रहने वाले लोगों की सुरक्षा को लेकर प्रशासनिक स्तर पर निगरानी की जरूरत और बढ़ गई है।
हादसे के बाद अदालत ने भी पीजी इमारतों की सुरक्षा को लेकर सख्त रुख अपनाया था। दिल्ली हाईकोर्ट ने घटना के बाद नगर निगम को एक सप्ताह के भीतर पीजी इमारतों का सुरक्षा ऑडिट करने का निर्देश दिया था। अदालत के इस आदेश का उद्देश्य पीजी के तौर पर इस्तेमाल की जा रही इमारतों की सुरक्षा स्थिति की जांच करना और संभावित खतरों की पहचान करना था।
इसके साथ ही हाईकोर्ट ने नगर निगम से यह जानकारी भी मांगी थी कि पीजी और इस तरह के आवासों को संचालित करने के लिए फिलहाल किस तरह की नियामक व्यवस्था लागू है। अदालत ने नगर निगम के अलावा इन आवासीय परिसरों के संचालन से संबंधित मौजूदा नियमों और व्यवस्था का विवरण भी मांगा था। इससे यह स्पष्ट है कि हादसे के बाद केवल एक इमारत की जांच तक मामला सीमित नहीं रहा, बल्कि राजधानी में पीजी संचालन और उससे जुड़ी सुरक्षा व्यवस्था की भी समीक्षा की जा रही है।
इस पूरे मामले में अब आरोपी सुधांशु और शुभम त्यागी की न्यायिक हिरासत के दौरान जांच आगे बढ़ेगी। हादसे के बाद किए गए पीजी सर्वे में 138 इमारतों में मरम्मत की जरूरत और चार इमारतों को खतरनाक घोषित किए जाने से राजधानी में पीजी इमारतों की सुरक्षा को लेकर गंभीरता बढ़ी है। वहीं, हाईकोर्ट के सुरक्षा ऑडिट और नियामक व्यवस्था से जुड़ी जानकारी मांगने के आदेश के बाद पीजी संचालन की सुरक्षा व्यवस्था पर भी निगरानी बढ़ाई गई है।






