नेशनल डेस्क, आर्या कुमारी।
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच समाजवादी पार्टी ने अपने बागी विधायकों की संभावित वापसी को लेकर नरम रुख अपनाया है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, जो विधायक जिन परिस्थितियों में अलग हुए थे, वे उसी प्रक्रिया से दोबारा पार्टी में शामिल हो सकते हैं, बशर्ते वे अपनी निष्ठा और प्रतिबद्धता स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करें।
सूत्र बताते हैं कि सत्ताधारी दल भारतीय जनता पार्टी में अपेक्षित महत्व न मिलने से कुछ असंतुष्ट विधायक असहज महसूस कर रहे हैं और उन्होंने फिर से सपा नेतृत्व से संपर्क साधना शुरू कर दिया है। पार्टी की ओर से संकेत दिया गया है कि वापसी के दरवाजे पूरी तरह बंद नहीं हैं, लेकिन इसके लिए आचरण के जरिए विश्वास बहाल करना होगा।
आगामी राज्यसभा चुनाव को इन बागी विधायकों की वापसी की कसौटी माना जा रहा है। उत्तर प्रदेश से राज्यसभा की 10 सीटों पर 25 नवंबर को मतदान प्रस्तावित है। माना जा रहा है कि यदि संबंधित विधायक सपा प्रत्याशियों के समर्थन में मतदान करते हैं, तो उनके लिए पुनः पार्टी में शामिल होने का रास्ता आसान हो सकता है।
पार्टी सूत्रों का कहना है कि किसी लिखित माफीनामे की शर्त नहीं रखी गई है। नेतृत्व का मानना है कि राजनीतिक व्यवहार और अनुशासन ही निष्ठा की वास्तविक परीक्षा है। फरवरी 2024 के राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग के बाद सपा ने कड़ा रुख अपनाते हुए कई विधायकों को निष्कासित कर दिया था। उस चुनाव में भाजपा के आठ और सपा के दो उम्मीदवार विजयी हुए थे।
वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों में सपा संगठन को मजबूत करने और असंतुष्ट नेताओं को फिर से जोड़ने की रणनीति पर काम करती दिख रही है। पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव पहले ही संकेत दे चुके हैं कि संगठन सर्वोपरि है और जो भी पार्टी की विचारधारा व अनुशासन को स्वीकार करेगा, उसके लिए अवसर खुले हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राज्यसभा चुनाव से पहले सपा का यह लचीला रुख विपक्षी एकजुटता और संगठनात्मक मजबूती के लिहाज से महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।







