विदेश डेस्क, आर्या कुमारी।
वाशिंगटन। सहारा रेगिस्तान में मिला लाल रंग का एक उल्कापिंड पृथ्वी पर मौजूद अधिकांश चट्टानों से भी पुराना निकला है। वैज्ञानिकों की जांच में पुष्टि हुई है कि यह पत्थर पृथ्वी का हिस्सा नहीं, बल्कि मंगल ग्रह से आया है और इसकी उम्र करीब 4.1 अरब वर्ष है। यह खोज प्रारंभिक मंगल ग्रह की भौगोलिक और भूवैज्ञानिक परिस्थितियों को समझने के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। करीब चार साल पहले रेगिस्तान में मिले इन पत्थरों के बारे में वैज्ञानिकों ने गुरुवार को साइंस पत्रिका में प्रकाशित एक शोध पत्र के माध्यम से जानकारी दी।
इन सभी टुकड़ों को मिलाकर बनी अंतरिक्ष चट्टान को 'तेघाजा 001' नाम दिया गया है। इसका नाम माली में स्थित एक प्राचीन और अब परित्यक्त नमक खनन बस्ती के नाम पर रखा गया है, जो उस स्थान के नजदीक है जहां उल्कापिंड के ये टुकड़े मिले थे।
कैलिफोर्निया स्थित नासा की जेट प्रोपल्शन लेबोरेटरी के ग्रह वैज्ञानिक और शोध पत्र के प्रमुख लेखक यांग लियू ने कहा कि इतनी प्राचीन वस्तु का मिलना बेहद दुर्लभ है। उनके अनुसार, इस तरह के उल्कापिंड वैज्ञानिकों को सौरमंडल के शुरुआती इतिहास और मंगल ग्रह के विकास को समझने का महत्वपूर्ण अवसर देते हैं। अब तक मंगल ग्रह से आए 400 से अधिक उल्कापिंडों की पहचान की जा चुकी है, लेकिन इनमें से केवल दो उल्कापिंड ऐसे हैं जिनकी उम्र तेघाजा 001 के बराबर है। इनमें एलन हिल्स 84001 और नार्थवेस्ट अफ्रीका 7034 शामिल हैं। नार्थवेस्ट अफ्रीका 7034 को आमतौर पर 'ब्लैक ब्यूटी' के नाम से जाना जाता है। इस तरह तेघाजा 001 मंगल ग्रह से प्राप्त सबसे प्राचीन उल्कापिंडों में शामिल हो गया है।
वैज्ञानिकों के लिए यह उल्कापिंड किसी टाइम मशीन से कम नहीं है, क्योंकि इसमें संरक्षित खनिज मंगल ग्रह के शुरुआती इतिहास की जानकारी देते हैं। इसके भीतर मौजूद आग्नेय खनिजों का विशेष मिश्रण मंगल ग्रह के निर्माण के कुछ सौ मिलियन वर्ष बाद की परिस्थितियों का प्रमाण सुरक्षित रखता है। इन खनिजों के अध्ययन से वैज्ञानिक उस समय के मंगल ग्रह की स्थिति का पता लगा सकते हैं, जब उसका निर्माण शुरुआती चरण में था और उसकी आंतरिक संरचना विकसित हो रही थी। इस तरह यह चट्टान अरबों वर्ष पुराने भूवैज्ञानिक इतिहास को समझने का दुर्लभ अवसर प्रदान करती है।
शोध के अनुसार, तेघाजा 001 में मौजूद खनिजों से प्रारंभिक मंगल ग्रह के मेंटल और क्रस्ट यानी उसके आंतरिक आवरण और बाहरी ठोस परत के बारे में महत्वपूर्ण संकेत मिलते हैं। इनके विश्लेषण से वैज्ञानिक यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि मंगल ग्रह के शुरुआती दौर में उसकी आंतरिक संरचना कैसी थी और समय के साथ उसमें किस तरह के बदलाव हुए। करीब 4.1 अरब वर्ष पुराने इन खनिजों में संरक्षित जानकारियां मंगल ग्रह के निर्माण के शुरुआती समय की परिस्थितियों को सामने लाने में मदद कर सकती हैं। ऐसे में सहारा रेगिस्तान से मिला यह उल्कापिंड न केवल अपनी असाधारण उम्र के कारण महत्वपूर्ण है, बल्कि प्रारंभिक मंगल ग्रह के इतिहास और उसकी भूवैज्ञानिक संरचना से जुड़े रहस्यों को समझने के लिए भी वैज्ञानिकों के लिए एक अहम खोज साबित हो सकता है।







