लोकल डेस्क, अश्विनी कुमार।
रक्सौल: मनुष्य के जीवन में सुख केवल धन-संपत्ति या भौतिक सुविधाओं से नहीं आता, बल्कि सरलता, स्पष्टता, स्नेह और समझदारी जैसे गुणों से जीवन वास्तव में सुखमय बनता है। सुख का घर इन्हीं चार मजबूत स्तंभों पर टिका होता है। इनमें से किसी एक की कमजोरी भी जीवन के संतुलन को प्रभावित कर सकती है।
जीवन में समय, सच्चे मित्र और रिश्ते सबसे अनमोल धरोहर हैं। ये हमें बिना किसी कीमत के मिलते हैं, लेकिन इनकी वास्तविक कीमत तब समझ आती है, जब इनमें से कुछ हमारे जीवन से दूर हो जाते हैं। इसलिए समय रहते इनकी कद्र करना और रिश्तों को स्नेह व विश्वास से संभालकर रखना चाहिए।
सच्चा त्याग वह नहीं है, जिसमें व्यक्ति अपनी इच्छा से किसी चीज को छोड़कर उसका अहसास दूसरों को कराता रहे। वास्तविक त्याग वह है, जिसमें हम किसी दूसरे की आवश्यकता को समझकर अपने स्वार्थ या सुविधा का त्याग करें और उसका प्रदर्शन भी न करें। सच्चा त्याग तन और धन से ही नहीं, बल्कि मन से किया गया त्याग होता है।
उन्होंने कहा कि जीवन हमें अलग-अलग रूपों में आगे बढ़ने का संदेश देता है। धन बचाने की बात करता है, कैलेंडर समय के साथ बदलने की सीख देता है, समय भविष्य की योजना बनाने को प्रेरित करता है और भविष्य को बेहतर बनाने की चुनौती देता है। सुंदरता प्रेम पाने की इच्छा जगाती है, लेकिन ईश्वर का सबसे सरल संदेश है—कर्म करते रहो और मुझ पर विश्वास रखो।
उन्होंने कहा कि खुश रहना भी जीवन जीने की एक कला है। जो व्यक्ति स्वयं खुश रहना नहीं चाहता, उसे कोई बाहरी परिस्थिति स्थायी खुशी नहीं दे सकती। इसके विपरीत, जिसने विपरीत परिस्थितियों में भी मुस्कुराना सीख लिया, उसे कोई आसानी से खुशियों से वंचित नहीं कर सकता। जीवन में परिस्थितियां बदलती रहती हैं, लेकिन प्रेम, दोस्ती और अपनत्व ऐसे भाव हैं, जिन पर उम्र का प्रभाव नहीं पड़ता। ये ईश्वर के दिए हुए अनमोल उपहार हैं, जिन्हें हमेशा संभालकर रखना चाहिए।
उक्त विचार लायंस क्लब इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 322ई जोन 41 सत्र (26-27) के जोन चेयरपर्सन सह डिस्ट्रिक्ट चेयरपर्सन एवं भारत विकास परिषद् , रक्सौल के सेवा संयोजक सह मीडिया प्रभारी सह सामाजिक कार्यकर्ता बिमल सर्राफ ने प्रेस से साझा किया।
श्री सर्राफ ने कहा कि जीवन के सफर में यदि वास्तव में खुश रहना है तो अपने फैसले स्वयं लेने की क्षमता विकसित करनी होगी। केवल दुनिया क्या कहेगी या परिस्थितियां कैसी हैं, इसके आधार पर जीवन के महत्वपूर्ण निर्णय नहीं लेने चाहिए। व्यक्ति किसी की अच्छी सोच में, किसी की दुआओं में और किसी के दिल में जगह बना ले, तो इससे बड़ी खुशी और उपलब्धि कुछ नहीं हो सकती।
उन्होंने कहा कि ज्ञान का सार केवल बहुत कुछ जान लेना नहीं, बल्कि भीतर से मुस्कुराना और जीवन को सकारात्मक दृष्टि से देखना है। वहीं सेवा का वास्तविक अर्थ अपनी खुशी और मुस्कान को दूसरों तक पहुंचाना है। ईश्वर हर व्यक्ति को जीवन में अवसर अवश्य देते हैं। उन अवसरों का सदुपयोग करना है या दुरुपयोग, यह मनुष्य के कर्म और विवेक पर निर्भर करता है।
बिमल सर्राफ ने कहा कि प्रेम जीवन की सबसे बड़ी शक्ति है। प्रेम के माध्यम से रिश्तों को मजबूत किया जा सकता है, समाज में अपनत्व बढ़ाया जा सकता है और प्रकृति तथा देश के प्रति जिम्मेदारी का भाव विकसित किया जा सकता है। इसलिए प्रेम केवल किसी एक व्यक्ति तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि परिवार, रिश्तों, समाज, प्रकृति और देश—हर जगह प्रेम और सम्मान का भाव होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि जीवन को सुखी और सार्थक बनाने के लिए सरल रहें, स्पष्ट रहें, रिश्तों को सम्मान दें, समय की कद्र करें, अवसरों का सदुपयोग करें और हर परिस्थिति में सकारात्मक सोच बनाए रखें। जहां प्रेम है, वहां अपनत्व है; जहां समझदारी है, वहां शांति है और जहां सकारात्मकता है, वहीं जीवन में सच्चे सुख का वास है।






