लोकल डेस्क, संजय दास थारू।
- गांव में बाजार की सुविधा मिलने से बिचौलियों पर निर्भरता घट रही, कृषि के प्रति किसानों का आकर्षण बढ़ा
बीरगंज: स्थानीय स्तर पर हाट-बाजार तथा किसान बाजारों का विस्तार होने से किसानों को अपने खेतों में उत्पादित कृषि उपज का उचित मूल्य मिलने लगा है। गांव और स्थानीय बस्तियों में ही बाजार की सुविधा उपलब्ध होने से किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए दूर के बाजारों में जाने की मजबूरी भी कम हो रही है।
इससे पहले किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए बिचौलियों पर निर्भर रहना पड़ता था। खेत से कृषि उपज खरीदने वाले बिचौलिये किसानों से अपेक्षाकृत कम कीमत पर सामान खरीदकर बाजार में ऊंचे दाम पर बेचते थे। इसके कारण किसानों को अपनी उपज का वास्तविक मूल्य नहीं मिल पाता था। स्थानीय हाट-बाजार और किसान बाजारों के संचालन एवं विस्तार से अब किसान और उपभोक्ता के बीच सीधे कारोबार का वातावरण बनने लगा है।
स्थानीय बाजार में किसान अपनी उपज सीधे उपभोक्ताओं को बेच पा रहे हैं। इससे कृषि उत्पादों के मूल्य में पारदर्शिता आने के साथ किसानों की आय भी बढ़ने लगी है। वहीं, उपभोक्ताओं को भी स्थानीय स्तर पर ताजी कृषि उपज उपलब्ध हो रही है। इस कारण किसान बाजार दोनों पक्षों के लिए उपयोगी साबित हो रहे हैं।
विशेष रूप से सब्जी, फल तथा अन्य स्थानीय कृषि उत्पादों का उत्पादन करने वाले किसानों के लिए ऐसे बाजार आय का महत्वपूर्ण माध्यम बन रहे हैं। बाजार की उपलब्धता सुनिश्चित होने से किसान उत्पादन बढ़ाने, नई कृषि तकनीक अपनाने तथा व्यावसायिक रूप से खेती करने के लिए भी उत्साहित हो रहे हैं।
कृषि उत्पादन के बाद उचित बाजार नहीं मिलने की समस्या धीरे-धीरे कम होने से गांवों में कृषि के प्रति आकर्षण भी बढ़ रहा है। अपने गांव और आसपास ही उपज बेचकर नियमित आमदनी होने की संभावना के कारण युवाओं सहित स्थानीय किसान भी कृषि व्यवसाय को आय का भरोसेमंद माध्यम मानने लगे हैं।
स्थानीय हाट-बाजारों को और व्यवस्थित करते हुए आवश्यक बुनियादी ढांचा, भंडारण, स्वच्छता, मूल्य सूचना तथा बिक्री प्रबंधन की सुविधाओं का विस्तार किया जाए तो किसानों को और अधिक लाभ मिल सकता है। उत्पादन से लेकर विपणन तक उचित व्यवस्था होने से स्थानीय कृषि उपज को बाजार मिलेगा, किसानों की आय बढ़ेगी और उपभोक्ताओं को भी ताजी एवं स्थानीय उपज आसानी से उपलब्ध हो सकेगी।
किसानों की उपज को स्थानीय बाजार से जोड़ने वाली ऐसी पहल बिचौलियों पर निर्भरता कम करने के साथ-साथ गांव की आर्थिक गतिविधियों को भी गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। स्थानीय स्तर पर बाजार की पहुंच बढ़ने से कृषि उत्पादन में वृद्धि और किसानों के जीवन स्तर में सकारात्मक बदलाव आने की उम्मीद है।







