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स्पेशल इंटेलिजेंस ऑपरेशन "मिशन निर्भया"

नेशनल डेस्क, आकाश अस्थाना ।

  • साइबर मानव तस्करी के अंतरराज्यीय नेटवर्क का भंडाफोड़, नेपाली नाबालिग सकुशल रेस्क्यू, 03 आरोपी गिरफ्तार

नई दिल्ली। सोशल मीडिया और मोबाइल गेमिंग प्लेटफॉर्म के माध्यम से नाबालिग लड़की  को अपने जाल में फंसाकर नेपाल से गुजरात और राजस्थान तक पहुंचाने वाले एक संगठित साइबर मानव तस्करी नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए "मिशन निर्भया" के अंतर्गत एक नेपाली नाबालिग लड़की को सकुशल रेस्क्यू किया गया। इस कार्रवाई में मानव तस्करी गिरोह से जुड़े 03 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि नेटवर्क से जुड़े अन्य संदिग्धों की तलाश जारी है।

यह पूरा अभियान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समन्वित खुफिया कार्रवाई का उदाहरण बनकर सामने आया, जिसमें भारत और नेपाल की एजेंसियों ने मिलकर कार्य किया।

कैसे शुरू हुई जांच

05 जून 2026 को क्षेत्रक मुख्यालय एसएसबी, मंगलदोई (असम) को सूचना प्राप्त हुई कि नेपाल की 16 वर्षीय नाबालिग अंजली को 24 अप्रैल 2026 को बहला-फुसलाकर गायब कर दिया गया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए इंस्पेक्टर मनोज कुमार शर्मा, क्षेत्रक मुख्यालय एसएसबी, मंगलदोई ने मानव स्रोतों (Human Intelligence), तकनीकी विश्लेषण (Technical Intelligence), डिजिटल ट्रैकिंग तथा अन्य गोपनीय माध्यमों से विस्तृत जांच प्रारंभ की।

जांच के दौरान सामने आया कि यह कोई साधारण गुमशुदगी नहीं, बल्कि संगठित साइबर मानव तस्करी सिंडिकेट का मामला हो सकता है। 

साइबर मानव तस्करी कैसे करती है काम

जांच में सामने आया कि यह गिरोह आधुनिक तकनीक का उपयोग कर पहले सोशल मीडिया और ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म पर किशोरियों और युवतियों से संपर्क स्थापित करता है। इसमें  Instagram, Facebook, WhatsApp, WeChat, TikTok तथा Roblox और Free Fire जैसे ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म पर नकली प्रोफाइल बनाकर दोस्ती करते हैं। धीरे-धीरे भावनात्मक संबंध बनाकर उन्हें प्रेम, नौकरी, मॉडलिंग, फिल्म, विदेश यात्रा, बेहतर जीवन, विवाह अथवा आर्थिक सहायता का झांसा दिया जाता है।

विश्वास जीतने के बाद नेपाल और बिहार के सीमावर्ती क्षेत्रों से राजस्थान, गुजरात तथा अन्य राज्यों में बुलाया जाता है, जहां उन्हें बंधक बनाकर यौन शोषण, जबरन श्रम, ऑनलाइन अश्लील सामग्री निर्माण, ब्लैकमेलिंग अथवा अन्य आपराधिक गतिविधियों में धकेले जाने की आशंका रहती है।

दो स्तर पर काम करता है गिरोह

जांच में खुलासा हुआ कि गिरोह दो अलग-अलग टीमों में कार्य करता है। पहली टीम साइबर विशेषज्ञों की होती है, जो सोशल मीडिया और गेमिंग प्लेटफॉर्म पर युवतियों को फंसाने का काम करती है। दूसरी टीम में अच्छे पहनावे, प्रभावशाली व्यक्तित्व और सामाजिक पहचान वाले लोग शामिल रहते हैं, जो पीड़िताओं को सुरक्षित माहौल का विश्वास दिलाकर अपने साथ ले जाते हैं तथा आगे नेटवर्क को सौंप देते हैं।

एसएसबी (गृह मंत्रालय) की तकनीकी जांच बनी सफलता की कुंजी

तकनीकी विश्लेषण, मोबाइल नंबरों की निगरानी, डिजिटल गतिविधियों के अध्ययन तथा मानव स्रोतों से प्राप्त सूचनाओं के आधार पर इंस्पेक्टर मनोज कुमार शर्मा ने यह महत्वपूर्ण इनपुट विकसित किया कि नेपाली नाबालिग को गुजरात के एक अज्ञात स्थान पर अवैध रूप से बंधक बनाकर रखा गया है। इसके साथ ही यह भी स्पष्ट हुआ कि पूरा नेटवर्क नेपाल-बिहार सीमा से संचालित मानव तस्करी गिरोह से जुड़ा हुआ है। 

रक्सौल से मिला महत्वपूर्ण इनपुट

बाद में स्थानीय स्रोतों से सूचना प्राप्त हुई कि गिरोह से जुड़े कुछ संदिग्ध 30 जून एवं 01 जुलाई 2026 के दौरान गुजरात-राजस्थान क्षेत्र से भारत-नेपाल सीमा के रक्सौल क्षेत्र में आने वाले हैं। इस सूचना के आधार पर उनके मोबाइल नंबर, गतिविधियों और संभावित आवागमन पर लगातार तकनीकी एवं मानव आसूचना के माध्यम से निगरानी रखी गई।

नेपाल पुलिस के साथ तत्काल साझा की गई खुफिया सूचना

पूरे ऑपरेशन के दौरान इंस्पेक्टर मनोज कुमार शर्मा ने प्राप्त खुफिया जानकारी तत्काल अतिरिक्त महानिरीक्षक पुलिस उमा चतुर्वेदी (नेपाल पुलिस मुख्यालय, काठमांडू) तथा पुलिस अधीक्षक सुदीप राज पाठक, जिला पर्सा (नेपाल) के साथ साझा की।
नेपाल पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए गिरोह से जुड़े तीन महत्वपूर्ण संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ प्रारंभ की।

राष्ट्रीय स्तर पर हुआ समन्वय

मामले की गंभीरता को देखते हुए क्षेत्रक मुख्यालय एसएसबी, मंगलदोई ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो, मिशन मुक्ति फाउंडेशन के निदेशक वीरेंद्र कुमार सिंह, रेस्क्यू एंड रिलीफ फाउंडेशन, गुजरात पुलिस तथा अन्य संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित किया।

वीरेंद्र कुमार सिंह के नेतृत्व में सफल रेस्क्यू

गुजरात में पीड़िता की लोकेशन की पुष्टि होने के बाद मिशन मुक्ति फाउंडेशन के निदेशक वीरेंद्र कुमार सिंह ने स्थानीय पुलिस और संबंधित एजेंसियों के साथ संयुक्त अभियान चलाया।
03 जुलाई 2026 को विशेष रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान नेपाली नाबालिग को सुरक्षित मुक्त कराया गया। अभी नाबालिग लड़की को नेपाल वापस भेजने की प्रक्रिया गुजरात पुलिस द्वारा की जा रही है। 

संभावना व्यक्त की जा रही है कि इस नेटवर्क के माध्यम से कई अन्य लड़कियों को भी निशाना बनाया गया हो।

विशेषज्ञों की चेतावनी

सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि साइबर मानव तस्करी आज पारंपरिक मानव तस्करी से अधिक खतरनाक रूप ले चुकी है। अपराधी अब हथियार नहीं बल्कि मोबाइल फोन, सोशल मीडिया, नकली पहचान, एन्क्रिप्टेड चैट और ऑनलाइन गेमिंग का उपयोग कर रहे हैं।
अभिभावकों को बच्चों की डिजिटल गतिविधियों पर सतर्क निगरानी रखने, अजनबियों से ऑनलाइन संपर्क से बचने तथा किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तत्काल सूचना पुलिस एवं सुरक्षा एजेंसियों को देने की सलाह दी गई है।

मिशन निर्भया की सबसे बड़ी उपलब्धि

इस पूरे अभियान ने यह सिद्ध किया कि यदि समय पर खुफिया सूचना, तकनीकी विश्लेषण, अंतरराष्ट्रीय समन्वय और सामाजिक संगठनों का सहयोग एक साथ कार्य करे, तो संगठित साइबर मानव तस्करी जैसे जघन्य अपराधों पर प्रभावी प्रहार किया जा सकता है।

इस अभियान में जिनका महत्वपूर्ण सहयोग रहा 

"मिशन निर्भया" के सफल संचालन एवं नेपाली नाबालिग पीड़िता के सकुशल रेस्क्यू में निम्न अधिकारियों एवं संस्थाओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा:

  • श्री उमा चतुर्वेदी – अतिरिक्त महानिरीक्षक पुलिस, पुलिस मुख्यालय, काठमांडू (नेपाल)।
  • श्री सुदीप राज पाठक – पुलिस अधीक्षक, जिला पर्सा, नेपाल,
  • श्री प्रियंक कानूनगो – सदस्य, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, नई दिल्ली।
  • श्री वीरेंद्र कुमार सिंह – निदेशक, मिशन मुक्ति फाउंडेशन, नई दिल्ली
  • इंस्पेक्टर मनोज कुमार शर्मा – क्षेत्रक मुख्यालय, एसएसबी, मंगलदोई (असम),
  • सिद्धांत घोष - रेसक्यू एंड रिलीफ फाउंडेशन 
  • इंस्पेक्टर बिशाल मल्ल  (नेपाल) 
  • विक्रम सुबेदि इंस्पेक्टर (नेपाल) 
  • एसआई चक्र पुजारा (नेपाल) 
  • हवलदार राम गिरी (नेपाल) 
  • एएचटीयू  इंस्पेक्टर अजीत सिंह गुजरात पुलिस  
  • श्री सुरेंद्र दास भरतमाई, रक्सौल

भारत एवं नेपाल की सुरक्षा एजेंसियों, मानवाधिकार संस्थाओं तथा सामाजिक संगठनों के संयुक्त प्रयासों से संचालित "मिशन निर्भया" ने एक बार फिर सिद्ध किया कि समयबद्ध खुफिया सूचना, तकनीकी विश्लेषण और प्रभावी अंतर-एजेंसी समन्वय के माध्यम से संगठित साइबर मानव तस्करी जैसे अंतरराष्ट्रीय अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकता है।