नेशनल डेस्क, मुस्कान कुमारी।
हिसार। हरियाणा के हिसार जिले के चिड़ौद गांव में कैंसर की भयावह स्थिति ने लोगों की जिंदगी पर साया डाल दिया है। ग्रामीणों का आरोप है कि पिछले दस सालों में करीब 50 लोग कैंसर से दम तोड़ चुके हैं, जबकि अभी भी 15 मरीज इलाज की जंग लड़ रहे हैं। मुख्य वजह बताया जा रहा है भूमिगत खारा पानी, जिसका टीडीएस स्तर 1500 से 2000 तक पहुंच गया है।
यह गांव करीब चार हजार की आबादी वाला है, जहां हर छठे महीने में औसतन एक कैंसर मरीज की मौत हो रही है। ग्रामीण सतबीर, मांगेराम, भूप सिंह, संजय और रमेश जैसे कई लोगों ने बताया कि बीमारी तेजी से फैल रही है। अधिकतर मामलों में गले और फेफड़ों का कैंसर देखा गया है। गांव में ऐसा कोई मोहल्ला नहीं बचा जहां कोई न कोई कैंसर पीड़ित न हो।
सुभाष नामक ग्रामीण ने अपनी पीड़ा साझा की। उन्होंने कहा कि दिसंबर 2025 में उनके भाई पटेल सिंह की कैंसर से मौत हो गई। "गांव में कैंसर का ऐसा कोई कोना नहीं जहां मरीज न हो। अभी तक 50 से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं। सब पानी को जिम्मेदार ठहराते हैं," सुभाष ने बताया।
ग्रामीणों का कहना है कि पीने का पानी मुख्य रूप से ट्यूबवेल से आता है, जो खारा और पीने लायक नहीं। महीने में सिर्फ 15 दिन नहर का पानी जलघर में छोड़ा जाता है, जिससे कुछ दिनों के लिए सप्लाई मिलती है। उसके बाद ट्यूबवेल का खारा पानी ही चलता है। गांव में एक-दो नलकूप हैं, लेकिन वे पर्याप्त नहीं। जांच में भी पानी अयोग्य पाया गया है।
ग्रामीण कई बार जिला उपायुक्त और अधिकारियों से मिल चुके हैं, लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं निकला। उनका डर है कि अगर यही स्थिति रही तो जल्द ही हर घर में एक कैंसर मरीज होगा। कैंसर स्पेशलिस्ट डॉ. लवनिश गोयल (हिसार) का मानना है कि हवा में प्रदूषण, पानी में दूषण और फसलों पर कीटनाशक-यूरिया का अत्यधिक छिड़काव कैंसर को बढ़ावा दे रहा है। रासायनिक तत्व भूमिगत पानी में घुलकर लोगों तक पहुंच रहे हैं। हालांकि गांव के सरपंच प्रतिनिधि मोलू राम का कहना है कि गांव में स्वच्छ पेयजल की सप्लाई हो रही है और पानी से कैंसर नहीं फैल रहा।
ग्रामीणों की मांग है कि तत्काल स्वच्छ पानी की स्थायी व्यवस्था हो, पानी की गहन जांच हो और प्रभावित परिवारों को मदद मिले। यह स्थिति न केवल चिड़ौद बल्कि आसपास के इलाकों के लिए भी चेतावनी है।







