विदेश डेस्क, ऋषि राज
रोम/वॉशिंगटन: वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जाने वाले होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता दिखाई दे रहा है। अमेरिकी प्रशासन ने संकेत दिया है कि यदि ईरान इस रणनीतिक जलमार्ग पर नियंत्रण स्थापित करने या उसकी आवाजाही को प्रभावित करने की कोशिश करता है, तो अमेरिका इस मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में उठाएगा।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य किसी एक देश की संपत्ति नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग है, जिससे दुनिया के कई देशों का व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति जुड़ी हुई है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि ईरान इस मार्ग को नियंत्रित करने या जहाजों की आवाजाही बाधित करने की कोशिश करता है, तो यह अंतरराष्ट्रीय कानूनों के खिलाफ माना जाएगा।
रुबियो ने कहा कि दुनिया के बड़े हिस्से में तेल और गैस की सप्लाई इसी मार्ग से होती है। ऐसे में यहां किसी भी प्रकार का तनाव वैश्विक अर्थव्यवस्था पर सीधा असर डाल सकता है। उन्होंने कहा कि अमेरिका इस मुद्दे पर अपने सहयोगी देशों के साथ लगातार बातचीत कर रहा है और जरूरत पड़ने पर संयुक्त राष्ट्र में प्रस्ताव लाकर अंतरराष्ट्रीय दबाव बनाया जाएगा।
विशेषज्ञों के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल है। फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ने वाला यह रास्ता वैश्विक तेल आपूर्ति का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है। प्रतिदिन लाखों बैरल कच्चा तेल इसी मार्ग से दुनिया के विभिन्न देशों तक पहुंचता है। ऐसे में यहां किसी भी सैन्य या राजनीतिक टकराव का असर तेल की कीमतों और वैश्विक बाजारों पर पड़ सकता है।
अमेरिका के इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है। कई पश्चिमी देशों ने समुद्री मार्गों की सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय व्यापार की स्वतंत्रता बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया है। वहीं ईरान की ओर से फिलहाल इस बयान पर आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन पहले भी ईरानी नेतृत्व इस क्षेत्र में अपनी रणनीतिक भूमिका को लेकर बयान देता रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मध्य पूर्व में पहले से जारी तनाव के बीच यह विवाद आने वाले दिनों में वैश्विक राजनीति का बड़ा मुद्दा बन सकता है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में प्रस्ताव आने की स्थिति में इस विषय पर अंतरराष्ट्रीय बहस और तेज होने की संभावना है।







